अगले साल बैंकिंग क्षेत्र में होंगे कई अहम सुधार, जानें सरकार का एजेंडा – Times Now Navbharat

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नई दिल्ली। साल 2022 को शुरू होने में कुछ ही दिन बचे हैं। अगले साल के लिए सरकार के एजेंडे में सरकारी क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण (Privatisation) और आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) के रणनीतिक विनिवेश (Disinvestment) के साथ आने वाले वर्ष में बैंकिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिलेंगे। महामारी की दूसरी लहर के प्रभाव के बावजूद, 2021 में बैंकिंग क्षेत्र ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। देश में कोरोना वायरस महामारी के बढ़ने, विशेष रूप से ओमिक्रोन वैरिएंट (Omicron variant) के मद्देनजर, सुधारों की गति में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
इतना हुआ बैंकों का फंसा हुआ कर्ज
सरकार की 4Rs की रणनीति (रिकग्निशन, रिजॉल्यूशन, रीकैपिटेलाइजेशन और रिफॉर्म्स) के अनुसार, बैंकिंग क्षेत्र की गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) 31 मार्च 2021 तक घटकर 8,35,051 करोड़ रुपये हो गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की जुलाई 2021 में जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) के अनुसार अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल एनपीए अनुपात मार्च 2021 के 7.48 फीसदी से बढ़कर मार्च 2022 में 9.80 फीसदी हो सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) का शुद्ध लाभ पहली तिमाही में बढ़कर 14,012 करोड़ रुपये हो गया और सितंबर 2021 को समाप्त दूसरी तिमाही में यह आंकड़ा बढ़कर 17,132 करोड़ रुपये हो गया। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में इन बैंकों का कुल लाभ (31,114 करोड़ रुपये) पिछले वित्त वर्ष (2020-21) में अर्जित कुल लाभ (31,820 करोड़ रुपये) के करीब है।
निजी क्षेत्र के बैंकों के फंसे हुए कर्ज में भी कमी
इसी तरह निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक सहित अन्य बैंकों ने भी फंसे कर्ज में कमी के साथ अच्छा मुनाफा कमाया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने 2021-22 के बजट में सार्वजनिक उपक्रम नीति (PSE) जारी करते हुए कहा था कि चार रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश किया जाएगा।
आगामी बजट सत्र में पेश किया जा सकता है बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक 
पीएसई नीति के तहत वित्त मंत्री ने बजट में दो सरकारी बैंकों के निजीकरण की भी घोषणा की थी। बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक को आगामी बजट सत्र में पेश किया जा सकता है, जिससे पीएसबी में न्यूनतम सरकारी हिस्सेदारी 51 फीसदी से घटाकर 26 फीसदी करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार सबसे पहले सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक का निजीकरण कर सकती है। हालांकि, हाल ही में संसद को दिए एक जवाब में सीतारमण ने कहा था कि मंत्रिमंडल ने दो पीएसबी के निजीकरण पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
मंत्रिमंडल ने मई में प्रबंधन नियंत्रण के हस्तांतरण के साथ ही आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। केंद्र सरकार और एलआईसी के पास आईडीबीआई बैंक की 94 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है।
(इनपुट एजेंसी- भाषा)
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