वित्तीय प्रबंधन: वित्तीय सबलता समय की मांग है इसलिए महिलाएं वित्तीय प्रबंधन की कमान संभालें, बचत और निवेश क… – Dainik Bhaskar

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महिलाएं अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए ख़ुद को सशक्त बना रही हैं। हालांकि, जब बात वित्तीय फ़ैसले लेने की होती है, तो उन्हें यह ‘वित्तीय’ शब्द काफ़ी जटिल लगता है। इसलिए सक्षम होने के बावजूद महिलाएं वित्तीय लक्ष्यों और उपलब्धियों से जुड़े मामलों से दूर रहना पसंद करती हैं और इनसे जुड़े फ़ैसलों के लिए पति या परिवार के किसी सदस्य पर निर्भर हो जाती हैं। महिलाओं की तरक़्क़ी के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा यह विचार है कि आपको पैसों से जुड़े मामले में दिमाग़ लगाने की आवश्यकता नहीं है।
निवेश का रास्ता ख़ुद चुनें
कई महिलाएं गृहिणी होने के साथ-साथ वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर भी हैं, इसके बावजूद वित्त के जुड़े फ़ैसलों को लेकर आज़ाद नहीं हैं। वित्तीय स्वतंत्रता और जागरूकता महिलाओं के लिए बेहद ज़रूरी हैं। वित्तीय स्वतंत्रता का मतलब आपके पास मौजूद पैसों से जुड़े गुणवत्तापूर्ण फ़ैसले लेने की आज़ादी से है। इस मामले में किसी तरह का कोई समझौता नहीं होना चाहिए। चाहे आप जीवन के किसी भी चरण में हों, प्रत्येक चरण का अपना एक लक्ष्य और उद्देश्य होता है, और आप कभी नहीं चाहेंगी कि वित्तीय चिंता आपकी ज़िंदगी को प्रभावित करे।
वित्तीय रूप से स्वतंत्र होने के ज़रिए ना केवल आप घरेलू ख़र्च में योगदान देंगी बल्कि परिवार के आर्थिक लक्ष्यों को भी हासिल करने में मदद कर सकेंगी। वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होने से आपके आत्मबल में भी इज़ाफ़ा होगा।
सही जगह निवेश करें समृद्ध बनें
संपत्ति निर्माण का रास्ता काफ़ी लंबा होता है। और अगर आप इस पर चल रही हैं तो आपको केंद्रित होते हुए सही दिशा में चलना होगा। इसके लिए मंत्र है – बचाएं, निवेश करें और समृद्ध बनें। बचत से आपको वित्तीय रूप से स्थिर होने में मदद मिलती है, जिसके बाद निवेश ज़रूर करना चाहिए। रुपए या धन मांसपेशियों की तरह हैं। जिस प्रकार इन्हें इस्तेमाल नहीं करें तो मांसपेशियां ताक़त खो देती हैं, वैसे ही अगर रुपए का इस्तेमाल सही ढंग से नहीं किया जाए या सही तरीक़े से निवेश नहीं किया जाए, तो इसकी क्रय शक्ति ख़त्म हो जाती है। बचत के साथ-साथ निवेश की मदद से आप अपना लक्ष्य हासिल कर सकती हैं।
आपके द्वारा किया गया निवेश ना केवल महंगाई को मात दे सकता है बल्कि यह ज़्यादा से ज़्यादा संपत्ति अर्जित कर बेहद कम समय में वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बना सकता है।
फाइनेंशियल प्लानिंग के चार चरण
आप चाहें गृहिणी हों या कामकाजी, अपने वित्तीय नियोजन यानी फाइनेंशियल प्लानिंग की शुरुआत करें। लक्ष्य तय करें, निवेश की योजना बनाएं, उसे लागू करें और फिर नियमित रूप से उसकी समीक्षा करें। लक्ष्य तय करना योजना की बुनियाद है। अगर किसी महिला ने वित्तीय लक्ष्य तय कर रखा है और निवेश की योजना भी है, तो यह उसके साथ-साथ उसके परिवार की वित्तीय स्थिरता को भी मज़बूती देगा। आपको लगता है कि आप वित्त प्रबंधन नहीं कर सकतीं तो किसी बेहतर फाइनेंशियल प्लानर की मदद ले सकती हैं, जो आपके लक्ष्य को समझकर पैसों और निवेश से जुड़े सभी सवालों के जवाब दे सके।
वित्तीय योजना की मदद से आमदनी, ख़र्च और निवेश को व्यवस्थित करती हैं ताकि पैसों का प्रबंधन करते हुए धन संचय, धन की बढ़त और सम्पत्ति के लक्ष्य को हासिल कर सकें।
मुआवज़े को ऐसे करें सुरक्षित
कोरोना काल में कई महिलाओं ने उनको खोया है जो घर में कमाई का एकमात्र ज़रिया थे। पति की मृत्यु के बाद पत्नियों को मुआवज़े के रूप में आर्थिक सहायता मिली है। इस रक़म को भविष्य के लिए सुरक्षित करें। बैंक में अपना बचत खाता खोलें और मिला हुआ मुआवज़े या बीमे की रक़म को इस खाते में जमा करें। इस रक़म को इस तरीक़े से जमा करना है कि आपका मूलधन सुरक्षित रहे और इस पैसे से एक नियमित आय मिलती रहे। इसके लिए पैसे को बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा करें। फिक्स्ड डिपॉजिट को मासिक आय विकल्प में खोलें और ब्याज की रक़म को अपने खाते में प्राप्त करें। इस मासिक आय से ना सिर्फ़ अपने ख़र्च चलाने में मदद मिलेगी बल्कि मूलधन भी सुरक्षित रहेगा।
सही जगह निवेश करें
किसी अच्छे बैंक में बचत खाता खोलें
अच्छे बैंक में अपना एक बचत खाता खोलें और बचत की रक़म को उसमें जमा करें। खाता खोलने से पहले न्यूनतम शेष राशि की आवश्यकता की जांच करें ताकि बिना वजह होने वाले बैंक के ख़र्चों से बचा जा सके। एटीएम कार्ड भी जारी करवाएं।
म्यूचुअल फंड में एसआईपी
म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करने का सबसे सुविधाजनक तरीक़ा एक व्यवस्थित निवेश योजना या एसआईपी है। यह ओपन-एंडेड है, जिसका अर्थ है कि आप किसी भी समय एसआईपी शुरू या समाप्त कर सकती हैं। खाता खोलने के बाद बचत के हिसाब से किसी भी अच्छे म्यूचुअल फंड में एसआईपी के ज़रिए निवेश करें।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड खाता खोलें
पब्लिक प्रोविडेंट फंड या पीपीएफ में आप एक वित्तीय वर्ष में डेढ़ लाख रुपए तक की राशि का निवेश कर सकती हैं। इस पर आपको सालाना 1.5 लाख तक आयकर राहत मिलती है। आपके द्वारा अर्जित ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगता और 15 वर्षों के बाद मिलने वाली परिपक्वता राशि भी कर मुक्त है। पांच साल के बाद पैसे निकाल सकती हैं।
गोल्ड फंड में नियमित निवेश करें
गोल्ड फंड भी ओपन-एंडेड फंड है जो गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) की इकाइयों में निवेश करता है। सोने के शेयरों में आमतौर पर सोने की क़ीमत के साथ बढ़ोतरी और गिरावट होती है, लेकिन कई अच्छी तरह से प्रबंधित खनन कंपनियां भी हैं जो सोने की क़ीमत कम होने पर भी लाभ देती हैं।
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